Rājasthāna ke mahārāṇā evaṃ rājāoṃ kā jīvana caritra

Voorkant
Rājasthānī Granthāgāra, 1985 - 164 pagina's

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अकबर अजमेर अत अधिकार अपनी अपने अब इस ई० उदयपुर उस समय उसका उसकी उसके उसको उसने उससे उसी एक और कर दिया करके कहा कि का काम कारण किया किले किसी की की तरफ कुछ के ऊपर के पास के लिये के साथ को कोई खां गई गया था गये गुजरात चित्तौड़ जब जा जाने जो जोधपुर तक तब तो था थी थे दिन दिल्ली दी दोनों नहीं नाम पंजाब पर पहुँचा पुत्र पुन फिर बहादुर बहुत बात बादशाह ने बाबर बीकानेर बैठा भाई भाग भी भेजा महाराणा को महाराणा ने मिर्जा में में भी मेवाड़ यह युद्ध रवाना रहा राजपूत राजपूतों राजस्थान राजा भगवन्तदास राज्य राणा राव राव ने लगा लिखा लिया लेकर लेकिन वक्त वर्ष वह वहां वि० वे शाही सं० संवत् सब सरदार सांगा सुन कर सुलतान सूरजमल से सेना सोमवार स्वयं हाथी ही हुई हुए है है कि हैं हो गया होकर होने

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